आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

किताबें और अकेला सफ़र

                
                                                         
                            अल्फ़ाज़ बनकर जो पन्नों पर ठहर जाती हैं,
                                                                 
                            
किताबें ही तो इंसान को खुद से मिलाती हैं।
जब राहों में सन्नाटा हो और कोई साथ न दे,
ये खामोश सफ़र में चलना सिखाती हैं।
किसी का इंतज़ार मत कर ऐ राही,
तू अकेले चलने का दम तो रख।
किताबों के ज्ञान को अपनी ढाल बना,
और हर मुश्किल में मुस्कुराने की आदत रख।
बस एक पहला कदम बढ़ाना ही काफी है,
मंजिलें खुद-ब-खुद तेरे करीब आएंगी।
आज जो तन्हाई में तू इतिहास पढ़ रहा है,
कल दुनिया तेरे ही पीछे-पीछे आएगी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर