प्रज्वलित करें चलो सभी, श्रद्धांजलि के दीप।
झुका शीश मन मौन ही, मान शहीद पनीप।।
मौन सहें पिटते रहें, तबला डमरू ढोल।
लड़ें वीर जो जानते, स्वतंत्रता का मोल।।
केवल उत्सव ही नहीं, आज़ादी कर्तव्य।
इसकी रक्षा में सजीं, सेनाऍं अति भव्य।।
बलिदानों के गर्व से, व्योम व्यापता तौर्य।
गये फिरंगी हार के, जीता भारत शौर्य।।
वीरों के सम्मान में, बालक वृद्ध जवान।
हम भारत के लोग हैं , गर्व तिरंगा शान।।
कॉंपत अरिदल दूर से, फहर तिरंगा देख।
भारत के जय घोष के, कर्तव्यों के लेख।।
करें पराजित घात को, शत्रु जटिल ज्यों वम्र।
परखो समझो जान लो, डसे उरग ज्यों नम्र।।
आज़ादी आतंक से, युग की है आवाज़।
कुचलें रगड़ मरोड़िये, भरे 'शौक' परवाज़।।
फॅंसे हुए हैं पेंच क्यों, आज़ादी के नाम?
ज्ञानवापि भू-कृष्ण दो, बॅंधे मुक्ति के धाम।।
ज्ञानवापि भू-कृष्ण की, हो गौरवमय मुक्ति।
आज़ादी इस भाव ही , सनातनों की तुष्टि।।
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