यह आवाज हमें जमीर ने पुकारा है,
मानवता का यह संदेश हमारा है,
मानव मानव एक समान,
अब ना होगा किसी का अपमान
ऊंच हो चाहे नींच सबको करना है सम्मान।
यह हम सब का नारा है,
मानवता का यह संदेश हमारा है।
जाति धर्म को मिटाना है,
यह कुर्तियां मानव के बीच से हटाना है।
सबका खून जब एक रंग है,
फिर मानव मानव क्यों नहीं एक सन्ग है ?
ऊंच नीच है भेदभाव जहां
कैसे दिखेगा मानव में एकता वहां ?
मानव मानव को यह बताना है
भेदभाव करके खुद ही पछताना है।
जब मानव या इंसान शब्द एक है
फिर जाति धर्म काहे को अनेक है।
प्रत्येक मानव के मन में प्रेम की दिया जलाना है
यह हम सब मिलकर आज ठाना है।
अल्लाह ईश्वर के लिए सभी बंदे एक हैं,
सबका मालिक एक और भगवान एक है
तो मानव उनका नाम रखा क्यों अनेक है ?.......
-रुपेश परदेशी
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