आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मानवता का संदेश

                
                                                         
                            यह आवाज हमें जमीर ने पुकारा है,
                                                                 
                            
मानवता का यह संदेश हमारा है,
मानव मानव एक समान,
अब ना होगा किसी का अपमान
ऊंच हो चाहे नींच सबको करना है सम्मान।
यह हम सब का नारा है,
मानवता का यह संदेश हमारा है।
जाति धर्म को मिटाना है,
यह कुर्तियां मानव के बीच से हटाना है।
सबका खून जब एक रंग है,
फिर मानव मानव क्यों नहीं एक सन्ग है ?
ऊंच नीच है भेदभाव जहां
कैसे दिखेगा मानव में एकता वहां ?
मानव मानव को यह बताना है
भेदभाव करके खुद ही पछताना है।
जब मानव या इंसान शब्द एक है
फिर जाति धर्म काहे को अनेक है।
प्रत्येक मानव के मन में प्रेम की दिया जलाना है
यह हम सब मिलकर आज ठाना है।
अल्लाह ईश्वर के लिए सभी बंदे एक हैं,
सबका मालिक एक और भगवान एक है
तो मानव उनका नाम रखा क्यों अनेक है ?....... 
-रुपेश परदेशी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 सप्ताह पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर