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गांव को गांव रहने दो

                
                                                         
                            कभी गर्मी कभी सर्दी कभी धूप और छांव रहने दो |
                                                                 
                            
कुछ भाव कुछ प्रभाव और बहुत कुछ अभाव रहने दो |
हया, दया फिर मर्यादा और अब इंसानियत भी खो दी ,
ऐ शहर तुमसे विनती है हमारे गांव को गांव रहने दो ||
- रुपेन्द्र बहादुर सिंह
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1 month ago

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