मेरे विचारों, मेरी आज़ादी पर
तुमने अपना अधिकार क्यों समझा?
हाथों की चूड़ियों को तुमने
बस बेड़ियाँ क्यों समझा?
पैरों की पायल को तुमने
ज़ंजीर सा क्यों समझा?
मुझ पर नित हँसते रहने वाले,
मेरे स्वाभिमान को क्यों न समझा?
मेरे विचारों, मेरी आज़ादी पर
तुमने अपना अधिकार क्यों समझा?
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