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तुम्हारे बिन

                
                                                         
                            “वो क़स्मे, वो वादे,वो वफ़ाएँ कहाँ हैं ?
                                                                 
                            
तुमने जो दी थी,वो सदायें कहाँ हैं?
महकाओगी जीवन,वो वादा तुम्हारा
वो फूल,वो ख़ुशबू,वो फ़िज़ाएँ कहाँ हैं.?
मेरी राह तकती,जो निगाहें कभी थी
वो नज़र,वो आँखे , वो निगाहें कहाँ हैं ?
जिन राहों में तुम और हम हमसफ़र थे
वो गली,वो डगर,वो राहें कहाँ हैं ?,
मिले जिससे राहत,मेरे दर्द-ए-गम को
वो जादू,वो टोना,वो दवाएँ कहाँ हैं ?”
-रोहित तिवारी
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2 महीने पहले

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