एक मृत शव शेष परे ,
धरनी के धर पर क्लेश परे ।
हे पौरुष प्राण!हे समर अनिमेष!
हे वायस विकराल!हे कृष्टि महाक्लेश!
हे अनभ्र हे तड़ित देव,
हे भासमान भयंकर भगवान!
सत्वर हरो प्राणी के प्राण!
हे तृण के तंत्री विशाल!
जागो जागो कुत्सित काल!
उठो उठो क्षति कर क्षितिज
ले उदधि,उदय हो उद्भिज
फोड़ फोड़ पतित काय को
तल-अतल-रसातल-पाताल
लेकर आओ लोक -ज्वाल
डहकेंगी कलुष काया
झुलसेगी चिता पर माया
देख मंडरा रही काक
बनाकर शव का पाक
दिगंत से आ रही दानवी
नर्तन करते नकारते पथ
कर देगी क्षीण दानवी दानवी
उगो हो भानु आओ भानु सुत !
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