कुत्ते की पूंछ सीधी कभी न हो पाए,
जैसे प्रदूषण से मुक्ति हम न पा पाए।
हर रोज़ हम करते हैं वादे नए,
पर हवा में जहर घुलता जाए।
कुत्ते की पूंछ को सीधा करने की कोशिश,
जैसे प्रदूषण को रोकने की कोशिश।
दोनों ही असंभव से लगते हैं,
पर कोशिश करने में क्या जाता है?
कुत्ते की पूंछ को पकड़ो, सीधा करो,
पर वो फिर से मुड़ जाती है, जैसे प्रदूषण।
हम भी हर रोज़ सफाई करते हैं,
पर कचरा फिर से जमा हो जाता है।
कुत्ते की पूंछ और प्रदूषण में समानता है,
दोनों ही हमारी लापरवाही का परिणाम है।
जब तक हम नहीं बदलेंगे अपनी आदतें,
तब तक ये समस्याएं बनी रहेंगी।
कुत्ते की पूंछ को सीधा करने का उपाय,
जैसे प्रदूषण को रोकने का उपाय।
दोनों ही कठिन हैं, पर असंभव नहीं,
बस हमें चाहिए दृढ़ संकल्प और सही दिशा।
-रमेश मेंदीरत्ता
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X