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बोझिल होता हर्फ़

                
                                                         
                            बुझी हुई यादों में झुका-झुका सा आसमान बोझिल होता हर्फ़...
                                                                 
                            
अपनी गलतियों को ढूंढ़ता हुआ सहम सा गया
ढलती शाम तक दिल को टटोलता हुआ की क्या होगा इस घटित प्रश्न का उत्तर,
कुछ न मिल पाने पे स्वतंत्रता की अनंत सीमा के पीछे भागता थक जाता है ताकि मिल जाए उसे उचित प्रश्नों का उत्तर
और आखिर मिल ही जाता है उत्तर की ये युद्ध है महाभारत का अपनों के साथ विवेचनाऒं को चीरता हुआ
ढाढंस बांधता की लड़ना है इस बार अपनों से अश्तित्व की खोज में ....
जिन्होंने लांघा है हर बार मुझे तोड़ने को अपना जमीर!
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6 घंटे पहले

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