तुम मेरी सुबह बन जाओ, मैं तुम्हारी शाम बन जाऊँ,
तुम मेरी धूप बन जाना, मैं तुम्हारा छाँव बन जाऊँ।
जमाने की हर खुशी तुम्हारे नाम कर दूँ,
तुम मुस्कुरा दो तो मैं जीने का पैग़ाम बन जाऊँ।
तुम थककर लौटो तो मैं सुकून बनकर मिलूँ,
तुम खामोश रहो तो मैं तुम्हारा जुनून बनकर मिलूँ,
दुनिया चाहे जितने सवाल हमारे बीच रख दे,
मैं हर सवाल का तुम्हारे लिए जवाब बन जाऊँ।
तुम बारिश की पहली बूँद बनकर बरसना,
मैं मिट्टी की तरह, तुम्हारी खुशबू में उतर जाऊँ,
तुम एक कदम मेरे साथ चलने का वादा करना,
मैं उम्रभर तुम्हारी राहों का मुकाम बन जाऊँ।
तुम मेरी सुबह बन जाओ, मैं तुम्हारी शाम बन जाऊँ,
तुम मेरी धड़कन बनो, मैं तुम्हारा नाम बन जाऊँ,
रिश्ता इतना गहरा हो जाए हमारे दरमियाँ…
तुम मेरी कहानी बनो, मैं तुम्हारा अंजाम बन जाऊँ।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X