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तराशा जाना बाकी है

                
                                                         
                            तुम तो पहले से ही हीरा हो,
                                                                 
                            
कुछ और तराशा जाना बाकी है,
मैं तुम्हें कोहिनूर सा देखना चाहता हूँ,
तुम्हारी चमक से नहीं बस इतना…
तुम्हारी पहचान से ज़माना रोशन देखना चाहता हूँ।

तुम्हारे भीतर जो हुनर छुपा बैठा है,
उसे मैं आसमान तक जाता देखना चाहता हूँ,
तुम खुद को बस आईने में मत देखो,
मैं तुम्हें दुनिया की नज़रों में चमकता देखना चाहता हूँ।

राहों में पत्थर मिलें तो घबराना मत,
हर चोट को अपनी पहचान बनाना मत भूलना,
हीरा भी तराशे जाने के बाद ही चमकता है…
मैं तुम्हें हर इम्तिहान से कोहिनूर बनते देखना चाहता हूँ।

तुम्हारी उड़ान किसी की मेहरबानी न हो,
तुम्हारी जीत कोई उधारी कहानी न हो,
जो लोग आज तुम्हें मामूली समझते हैं…
मैं उन्हें तुम्हारी मिसाल देते देखना चाहता हूँ।

तुम तो पहले से ही हीरा हो,
बस तुम्हें अपनी कीमत पहचाननी है,
मैं तुम्हें तिजोरी में कैद नहीं करना चाहता…
मैं तुम्हें कोहिनूर की तरह इतिहास बनते देखना चाहता हूँ।
-रतन कुमार कैथवास
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2 दिन पहले

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