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उलफ़त में, यही अंजाम मिला है हमको

                
                                                         
                            तेरी राहों में बिछाए हैं, निगाहों के दिए,
                                                                 
                            
रात ढल जाएगी, शायद सहर होने तक।

एक उम्मीद लिए बैठे हैं, तेरी चौखट पर,
उम्र गुज़र जाएगी, तेरे असर होने तक।

तूने पूछा ही नहीं, हाल कभी मेरा लेकिन,
हम सँवरते ही रहे, तेरा ज़िक्र होने तक।

कौन समझेगा, मेरी आँखों की नमी का मतलब,
दिल भी चुपचाप जलेगा, तेरे घर आने तक।

तुमको आना है तो, आ जाओ अभी लौट के तुम,
हम न रह जाएँ, कहीं सिर्फ़ ख़बर होने तक।

उलफ़त में, यही अंजाम मिला है हमको,
खुद से मिलते रहे, तुमसे बिछड़ते तक।
-रतन कुमार कैथवास
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15 घंटे पहले

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