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पत्थर तो न होने दे

                
                                                         
                            तेरी आँखों की झील में ठहरने की इजाज़त दे,
                                                                 
                            
अगर गुनहगार हूँ तेरा, तो ख़ुद में सँवर जाने दे।

तेरी ख़ामोश निगाहों ने जो इल्ज़ाम लिखा,
उस सज़ा को भी, हँसते हुए फंदा चूम लेने दे।

पहली मुलाक़ात में कुछ भी कहा ही न गया,
बस तेरी पलकों को, मेरी धड़कनों पर ठहर जाने दे।

एक मुद्दत से ये दिल, तेरी गली का मुसाफ़िर है,
आज बेनाम ही सही, तेरे दर पर बिखर जाने दे।

मैंने चाहा भी नहीं, तुझसे सितारों का नगर,
बस तेरी शाम का, इक छोटा-सा मंज़र मुझे दे दे।

जब भी बारिश ने, तेरी याद का पैगाम भेजा,
भीगे लम्हों को, मेरी रूह में घर करने दे।

तेरी मुस्कान ने, कितनों को उजाला बाँटा,
मेरे हिस्से की भी, एक किरण इधर आने दे।

निगाहें तेरी सौदे की दुकान नहीं, सजदे की जगह है,
दिल अगर टूट भी जाए, इसे पत्थर तो न होने दे।

कल अगर राहें, जुदा हों तो शिकायत कैसी,
आज की रात तो, किस्मत को सँवर जाने दे।

तेरी आँखों के समंदर का, किनारा न मिला,
डूबना ही मेरी मंज़िल है, उतर जाने दे।
-रतन कुमार कैथवास
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3 महीने पहले

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