तेरी कत्थई आँखों में, जो ख़्वाब पल रहे हैं,
उन्हें वक़्त की आँधियों से, बचाकर रखना।
अभी रेत में दबा दे, ज़माने की नज़र से दूर,
मगर दिल की ज़मीन पर, उन्हें ज़िंदा रखना।
हर ख़्वाब को, मुक़द्दर की जागीर मत समझना,
कुछ ख़्वाबों को, अपनी ज़िद बनाकर रखना।
तेरे ख़्वाबों को अभी थोड़ी परवाज़ देना है,
बंद पड़ी खिड़कियों को नया आग़ाज़ देना है।
जो पंख थक गए हैं सफ़र की धूल खाकर,
उन्हें हौसलों की धूप में फिर से आवाज़ देना है।
अभी आसमान छोटा है तेरी उड़ान के आगे,
तुझे अपनी नज़र को नया अंदाज़ देना है।
रेत में दबे बीज भी एक दिन दरख़्त बनते हैं,
अँधेरी रात के बाद ही उजाले स्पष्ट बनते हैं।
जो ख़्वाब आज दुनिया की नज़र में ख़ाक जैसे हैं,
वही कल मेहनतों से कामयाबी के सबब बनते हैं।
तू बस अपने इरादों की हिफ़ाज़त करना,
बड़े सपने अक्सर सब्र से ही बुलंद बनते हैं।
तेरी आँखों में जो ठहरा हुआ संसार है,
उसी में तेरी मंज़िल, उसी में तेरा क़रार है।
किसी के तंज़ से उम्मीदें बुझने मत देना,
तेरे भीतर ही तेरी जीत का इश्तिहार है।
तू अपने ख़्वाबों को परवाज़ देना सीख ले,
तेरे हिस्से में भी खुला हुआ आसमान तैयार है।
अपनी सुन्दर कत्थई आँखों के ख़्वाब मरने न देना,
उन्हें हालात की मिट्टी में बिखरने न देना।
हर ख़्वाब के पंखों पर हौसलों का रंग भर,
उन्हें उड़ने से पहले ही ठहरने न देना।
आज रेत में छुपा ले, कल सितारों तक पहुँचना,
अपने ख़्वाबों को कभी ख़ुद से बिछड़ने न देना।
-रतन कुमार कैथवास
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