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किताबों जैसा था

                
                                                         
                            वो क्या आएँगे,
                                                                 
                            
हमारे तसव्वुर में आज,
तुमने किससे सीखा,
उल्फ़त में मिलावट करना?
वो शख़्स किताबों जैसा था,
वो शख़्स...
ज़ुबानी याद हो गया।

एक शाम…
पुरानी लाइब्रेरी में
धूल से ढकी हुई
एक किताब मिली।
उसके पहले पन्ने पर
किसी ने लिखा था…
"कुछ लोग पढ़े नहीं जाते,
धीरे-धीरे जी लिए जाते हैं।"
मैं मुस्कुरा दिया।
क्योंकि मुझे,
उसकी याद आ गई।
वो भी तो,
किताबों जैसा ही था।
पहली मुलाक़ात में,
कुछ समझ नहीं आया।
दूसरी मुलाक़ात में,
कुछ पन्ने खुलने लगे।
तीसरी मुलाक़ात तक,
उसकी ख़ामोशियाँ भी,
समझ में आने लगी थीं।
मैंने कभी उससे पूछा था…
"तुम हर बात,
इतनी सलीके से कैसे कहते हो?"
वो हँसकर बोला…
"किताबें पढ़ने से,
शब्द नहीं मिलते,
ठहराव मिलता है।"
मैंने उस बात पर,
ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।
लेकिन जब वो चला गया,
तब समझ आया,
कुछ लोग,
अपनी मौजूदगी से नहीं,
अपनी अनुपस्थिति से,
सबसे ज़्यादा सिखाते हैं।
कई साल बाद,
एक दोस्त ने पूछा…
"भूल गए उसे?"
मैंने कहा…
"भूलना...
किताब का, आख़िरी पन्ना फाड़ देने जैसा नहीं होता।
कहानी तो,
फिर भी याद रहती है।"
वो बोला…
"फिर तकलीफ़ नहीं होती?"
मैंने बेमन से मुस्कुराकर कहा…
"पहले होती थी।
अब नहीं।
अब वो दर्द नहीं,
दृष्टि बन गया है।"
दोस्त ने हैरानी से पूछा…
"मतलब?"
मैंने कहा,
"मतलब...
अब जब भी किसी से मिलता हूँ,
अल्फ़ाज़ नहीं देखता,
नीयत पढ़ता हूँ।
क्योंकि मैंने,
उल्फ़त में मिलावट भी देखी है,
और ख़ालिस उल्फ़त भी।"
शाम ढल चुकी थी।
मैंने वह पुरानी किताब,
वापस शेल्फ़ पर रख दी।
उसकी जिल्द पुरानी थी,
कुछ पन्ने पीले पड़ चुके थे,
लेकिन उसके भीतर का सच,
अब भी नया था।
तब लगा,
कुछ लोग,
किताबों जैसे ही होते हैं।
उन्हें एक बार पढ़कर,
बंद नहीं किया जा सकता।
वो बार-बार खुलते हैं,
हर उम्र में,
एक नया मतलब देते हैं।
और जब वो,
ज़िंदगी से चले भी जाएँ,
तो अलमारी में नहीं,
यादों की ज़ुबान पर रखे रहते हैं।
वो शख़्स किताबों जैसा था...
मैंने उसे पढ़ा कम था,
जी ज़्यादा लिया।
इसलिए आज भी,
उसका कोई पन्ना नहीं खोलता,
फिर भी वो पूरा का पूरा
ज़ुबानी याद है।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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