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इसे बेपनाह ही कहेंगे

                
                                                         
                            मोहब्बत वो नहीं जो हर हाल में इज़हार माँगती है,
                                                                 
                            
न हर मुलाक़ात का वादा, न वफ़ा का व्यापार माँगती है।
सच्चा इश्क़ तो वो है जो उम्मीदों के बिना भी पलता है,
मिलने की राह न हो फिर भी दिल उसी के लिए मचलता है

मालूम है कि वो लौटकर शायद कभी नहीं आएगा,
फिर भी ये दिल उसी की आहट पर ठहर जाएगा।
कुछ रिश्ते मुक़द्दर से नहीं, रूह से निभाए जाते हैं,
कुछ लोग दूर रहकर भी उम्र भर दिल में बसाए जाते हैं।

न मिलने की कोई ज़िद है, न पाने की कोई शर्त है,
मेरी ख़ामोश मोहब्बत ही मेरी वफ़ा का सबूत है।
वो मेरा हो न सके, ये अलग बात है ज़माने की,
मैंने तो उम्र लगा दी उसके लौट आने की।

न शिकवा है ज़माने से, न वक़्त से कोई गिला है,
मेरे हिस्से में इंतज़ार आया, मैंने उसे भी अपना लिया है।
हर शाम उसकी याद का दीपक जलाता हूँ,
वो आए या न आए, मैं अपना वादा निभाता हूँ।

मिलने की उम्मीद टूटे, फिर भी प्यार कम न हो,
दूरियों के दरमियाँ दिल में कोई शिकवा न हो।
इश्क़ की असल पहचान कोई हासिल नहीं होता,
जिसमें मिलने की उम्मीद न हो, फिर भी इंतज़ार ख़त्म नहीं होता।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
12 घंटे पहले

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