तुम्हारी कोई इच्छा अधूरी न रह जाए,
इस बात का हमेशा ख़याल रखता हूँ,
तुम्हारे चेहरे पर शिकन न आए कभी,
मैं अपनी खुशियाँ भी संभालकर रखता हूँ।
तुम जो चाहो, उसे मुकद्दर बना दूँ,
तुम जो माँगो, उसे हासिल बना दूँ,
दुनिया भले इसे मेरी ज़िद कहे…
मैं तुम्हारी हर ख़्वाहिश को मंज़िल बना दूँ।
तुम्हारी आँखों में जो सपना पलता है,
मैं उसकी हिफ़ाज़त रात-दिन करता हूँ,
तुम्हें शायद एहसास भी नहीं होगा…
मैं तुम्हारी मुस्कान पर अपना सब कुछ न्योछावर करता हूँ।
तुम्हारी राह में काँटे न आ जाएँ,
इसलिए पहले ख़ुद उनसे गुज़रता हूँ,
तुम्हें फूलों-सी राह मिले हर कदम…
बस इसी ख़याल से मैं हर दर्द सहता हूँ।
तुम्हारी कोई इच्छा अधूरी न रह जाए,
बस यही मेरी सबसे बड़ी चाहत है,
तुम्हारी हर ख़ुशी मेरी अपनी ख़ुशी है…
और तुम्हारी मुस्कान ही मेरी इबादत है।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X