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हल्की सी नमी लगती है

                
                                                         
                            कौन रोया है यहाँ रात के सन्नाटे में,
                                                                 
                            
आज मिट्टी भी कुछ उदास-सी लगी है।

शायद इन बूंदों में, कोई दर्द छुपा बैठा है,
वरना बारिश तो, यूँ ही नहीं थमी लगती है।
किसी बिछड़े हुए, मौसम की कहानी होगी,
हरियाली भी आज, कुछ ग़मगीन-सी लगी है।

हमने समझा था, ये बस ओस की बूँदें हैं,
गौर से देखा तो, किसी की कमी लगती है,
घास में जज़्ब हुए होंगे, ज़मीं के आँसू,
पाँव रखता हूँ तो, हल्की सी नमी लगती है।
-रतन कुमार कैथवास
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6 दिन पहले

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