जब तक मंजिल पाने की दिल में सच्ची प्यास ना थी तब तक रास्ते में भटकता रहा,
जैसे ही मंजिल पर पहुंचने की दिल में सच्ची प्यास जगी रास्ता मिल गया...
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X