चाहे रहूं हमेशा दर्द में और निकलता रहे मेरे मुंह से आह हमेशा,
और चाहे सदा मिलती रहे मुझे इस दुनिया की खुशियों की पनाह हमेशा,
तेरे सच्चे इश्क़ की खातिर कहती है मेरे दिल की प्रत्येक धड़कन,
सचमुच मैं तुमसे हर स्थिति हर हाल में मोहब्बत करता रहूंगा बेपनाह हमेशा|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X