सचमुच बांध दे हर एक बहन हर एक भाई के कलाई में प्यार से राखी यदि,
तो कोई क्यों न पहचान लेगा जीवन में दिख जाए उसे प्रेम की झूठी बैसाखी यदि|
-मनस्व
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