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तुम्हें लौट कर फिर जाना है

                
                                                         
                            तुम्हें लौट कर फिर जाना है
                                                                 
                            
आओ कुछ पल बातें कर लें
छेड़ें मन के तार सुरीले
सपनों की इक चादर बुन कर…ऽऽ
चादर के ही महल बना लें…
तुम्हें लौट कर फिर जाना है
आओ कुछ पल बातें कर लें ।

तुम चन्दन की मूरत जैसी
अंग सुगन्ध से भरी पोटली
मैं ठहरा मटियारा मानुष
चंदन माँटी का मिलाप कर…ऽऽ
एक नई सी सूरत मढ़ लें…
तुम्हें लौट कर फिर जाना है..
आओ कुछ पल बातें कर लें ।

कदम तुम्हारे कमल पुष्प से
नख से शिख तक मोती माला
मेरी अनगढ़ काया पर ज्यों
मन-भावन से गीत सजा कर…ऽऽ
राग भरी सी कविता रच लें…
तुम्हें लौट कर फिर जाना है…
आओ कुछ पल बातें कर लें ।

राम कथा के पन्नों में तुम
जनक नन्दिनी सुघड़ सुता सी
कृष्ण की राधा के वियोग की
हृदय वेदना का विष पीकर…ऽऽ
मीरा की इक धुन को गढ़ लें…
तुम्हें लौट कर फिर जाना है
आओ कुछ पल बातें कर लें ।

आशाओं के मृदुल भाव से
हृदय वेदना के शूलों में
रस भीनीं बे-रस सी रसभरी
कुछ खट्टी-मीठी बातों से…ऽऽ
जीवन की इक नाव बना लें…

तुम्हें लौट कर फिर जाना है
आओ कुछ पल बातें कर लें ।
तुम्हें लौट कर फिर जाना है…
तुम्हें लौट कर फिर जाना है॥
-रमेश चन्द्र
 
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3 महीने पहले

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