आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

युवा चेतना

                
                                                         
                            युवा चेतना
                                                                 
                            

युवा न केवल उम्र है,
युवा नई पहचान।
सीख रहा जो हर घड़ी,
वही युवा महान॥

सूचनाओं के शोर में,
सत्य-स्वर पहचान।
चमक-दमक के जाल में,
मत खो अपना मान॥

जल्दी पाने की चाह में,
धीरज मत खोना।
गिरकर फिर उठना सदा,
राह न अपनी खोना॥

प्रश्न करो, तर्कों से
सत्य स्वयं पहचान।
अंधी दौड़ न दौड़कर,
अपनी राह बनान॥

केवल अपना कल नहीं,
सबका कल सँवार।
अपने सपनों की किरण,
कर दे देश उजियार॥

हाथों में हो कर्मबल,
मन में विज्ञान महान।
हृदय भरा हो प्रेम से,
सेवा हो पहचान॥

नव-विचार की ज्योति से,
नव युग को आलोक।
ज्ञान बने संबल सदा,
दूर करे हर शोक॥

उम्र भले बढ़ती रहे,
मन हो सदा जवान।
सीखने की प्यास रहे,
यही युवा की शान॥

अपने हित से ऊपर उठ,
जनहित का कर मान।
जिसके कर्मों से बने,
राष्ट्र नया महान॥

युवा वही जो राह में,
गिरे हुए को थाम।
अपने संग समाज को,
लेकर बढ़े तमाम॥

स्वप्न अकेले मत सजाओ,
स्वप्न करो साकार।
अपने श्रम से देश का,
लिख दो नव इतिहास॥

युवा होना उम्र नहीं,
युवा चेतना-धार।
अपने संग राष्ट्र को,
ले चलना साकार॥
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
12 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर