कोई कहे पार्वती कोई हेमवती बुलाता है।
शक्ति का प्रथम रूप शैलपुत्री कहलाता है।।
पूर्व जन्म में सती रूप में राजा दक्ष के घर जन्म लिया।
ब्याही गईं महादेव संग पाया बहनों से भिन्न पिया।।
प्रजापति बने दक्ष देवताओं को बुलाकर यज्ञ किया।
नहीं बुलाया शिव व सती को शंकर जी को रुष्ट किया।।
माता सती को पता चला वो जाने को अकुलाईं।
समझाने पर भी ना मानी तो जाने की आज्ञा पाईं।।
जाकर देखा वहां नजारा शंकर का अपमान सुना।
कूद पड़ी हवन कुण्ड में विध्वंश यज्ञ का मान हुआ।।
दूजे जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया।
नाम पड़ा है शैलपुत्री शिव शंकर का वरण किया।।
बांए हाथ में कमल पुष्प दाहिने में लिए त्रिशूल।
होकर आरूढ़ वृषभ पर भक्तों के दुख करती निर्मूल।।
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