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"आज - धूप खिली है आँगन में"

                
                                                         
                            "आज - धूप खिली है आँगन में"
                                                                 
                            

कल की चिंता में जो खोया,
वो आज कभी न पाएगा,
जो आने वाला कल सोचे,
वह ये पल गँवाएगा।

आज ही जीवन का सच है,
आज ही सांसों की डोर,
बीत गया जो सपना था बस,
कल का नहीं कोई छोर।

उठो, समेटो इस लम्हें को,
धूप खिली है आँगन में,
उम्मीदों के रंग सजा लो,
खुले सपनों के दामन में।

न कल का कोई बोझ रहे,
न बीते पल की छाया हो,
जी लो इस पल को खुलकर तुम,
इसी क्षण में जीवन समाया हो।

हँसी बाँट लो, प्यार लुटा दो,
जो कहना है, आज कहने दो,
कल का सूरज किसने है देखा,
बस बहती धारा संग बहने दो।

यह आज तुम्हारा अपना है,
इसको न यूँ ही खोने दो,
जो बीज बोया है कर्मों का,
इसी पल में पल्लवित होने दो।

 
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एक महीने पहले

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