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नाथ और कर्म

                
                                                         
                            विपरीत चल रही हो हवा तो
                                                                 
                            
चप्पू लेना है साथ,
वेगमय हो लहरें तो समय भी
कठिन होता हाथ,
नहीं रहे सखा तूफ़ान और लहरें
कभी जहाज़ के!
कर्म को धर्म समझ कर्म करे मल्लाह,
तो मदद करते हैं नाथ.

 
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1 सप्ताह पहले

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