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मुंशी प्रेमचंद

                
                                                         
                            31 जुलाई को अवतरित धनपत राय ,
                                                                 
                            
लिखते थे वो आना नाम नबाब राय,
लेखनी के वो धनी धनपत थे मुंशीजी ,
मानसरोवर से प्रवाहित किया साहित्य ,
मुंशीजी का साहित्य जब पढ़ते हैं ,
हिन्दी से "प्रेम" जाग्रत हो जाता है ,
सरलता,रोचकता, उनका मूल "मंत्र" है ,
देशकाल और वातावरण का रंग है ,
अनेक रंगो से रचित है उनकी रंगभूमि,
देशभक्ति के रंग मे है उनकी कर्मभूमि ,
भारतीय संस्कृति के बने हैं रेखाचित्र ,
"सेवासदन" ही तो हैं प्रेम के "प्रेमाश्रम"
पूस की रात मे निर्मला ने किया गोदान ,
दो बैलो की कथा सुनाता नमक का दारोगा ,
प्रेमचंद जी है हिन्दी के कथाकार विराट ,
इसलिए वो कहलाते हैं उपन्यास सम्राट |
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2 महीने पहले

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