तुम कब खो गए
तुम डरते रहे
दूसरों को खोने से,
हर रिश्ते को बचाते रहे,
हर किसी को अपना बनाए रखने की
कोशिश करते रहे।
किसी की नाराज़गी से डरते रहे,
किसी की दूरी से घबराते रहे,
सबको संभालते-संभालते
खुद को ही भूलते रहे।
तुम किसे खो रहे हो,
यह सोचते रहे हर पल,
मगर इस भागदौड़ में
तुम कब खुद से दूर हो गए,
किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।
जिन्हें खोने से डरते रहे,
वे अपनी दुनिया में व्यस्त रहे,
और जिसे सबसे ज्यादा
संभालने की जरूरत थी—
वह तुम खुद थे।
— रजनी
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