सौंदर्य की अगली सीढ़ी
जो भी सौंदर्य तुमने
अपने जीवन में संजोया है,
उसे अंतिम सौंदर्य मत समझना,
अभी और सुंदर होना बाकी है।
जैसे गाड़ी के दूसरे गियर की
एक सीमा होती है,
उससे आगे उसकी चाल
नहीं बढ़ सकती।
फिर तीसरा गियर लगाना पड़ता है,
दूसरे गियर को पीछे छोड़ना पड़ता है,
तभी गति नई ऊँचाई छूती है,
तभी सफ़र आगे बढ़ता है।
ठीक वैसे ही जीवन में,
जो कुछ तुमने पा लिया है,
जिसे तुमने अब तक सुंदर माना है,
कभी-कभी उसका विसर्जन भी करना पड़ता है।
पुराने को छोड़ने का साहस रखो,
तभी नया सौंदर्य जन्म लेगा,
जो आज सुंदर लगता है,
कल उससे भी सुंदर रचने की कोशिश करो।
क्योंकि जीवन ठहरने का नाम नहीं,
हर पड़ाव के आगे एक और पड़ाव है,
जो बीत गया उसे छोड़ सको,
तभी सुंदरता का विस्तार है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X