आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

समझ और साथ

                
                                                         
                            समझ और साथ
                                                                 
                            

जो लोग आपको समझना चाहते हैं,
उन्हें किसी सफाई की जरूरत नहीं पड़ती,
वे आपकी खामोशी भी पढ़ लेते हैं,
हर बात को शब्दों में कहने की जरूरत नहीं पड़ती।

और जो आपको समझना ही नहीं चाहते,
उन्हें हजारों तर्क दे दीजिए,
हर सवाल का जवाब दे दीजिए,
फिर भी उनके मन में
आपकी कोई जगह नहीं बनती।

रिश्ते भी अजीब होते हैं,
जिन्हें सच में रिश्ता निभाना होता है,
वे परिस्थितियों से नहीं डरते,
मुश्किलें चाहे कितनी भी हों,
वे आपका हाथ नहीं छोड़ते।

और जिन्हें साथ रहना ही नहीं होता,
उन्हें बस एक बहाना चाहिए,
कभी परिस्थिति, कभी मजबूरी,
कभी आपकी कोई छोटी-सी गलती—
छोड़ने के लिए कारण नहीं,
सिर्फ बहाना चाहिए।

इसलिए हर रिश्ते को
बार-बार समझाने की कोशिश मत करो,
जो आपका है, वह आपकी खामोशी में भी आपको समझेगा,
और जो आपका होना ही नहीं चाहता,
उसे रोककर भी क्या करोगे?

रिश्ते सफाइयों से नहीं,
नीयत और निभाने की इच्छा से बचते हैं।

— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर