खुदा सबका है
लोग अक्सर यह भूल जाते हैं,
कि खुदा किसी एक का नहीं, सबका है।
आज तुम्हारा अच्छा है,
कल हमारा भी अच्छा हो सकता है,
मगर लोग इतना सताते हैं,
जैसे उन्हें यकीन हो गया हो
कि खुदा तो सिर्फ उनका है।
मैं कहता हूँ—
मेरी राहों में काँटे मत बिछाओ,
क्या पता कल तुम्हें ही
मुझसे मिलने आना पड़े,
और उन्हीं काँटों पर
तुम्हें भी चलना पड़े।
इसलिए किसी की राह मुश्किल मत करो,
वक्त का पहिया घूमता जरूर है,
आज जो राह तुम्हारी है,
कल वही राह तुम्हारी परीक्षा भी हो सकती है।
खुदा सब देखता है,
और याद रखना—
वह किसी एक का नहीं,
सबका है।
— रजनी
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