आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुदा सबका है

                
                                                         
                            खुदा सबका है
                                                                 
                            

लोग अक्सर यह भूल जाते हैं,
कि खुदा किसी एक का नहीं, सबका है।

आज तुम्हारा अच्छा है,
कल हमारा भी अच्छा हो सकता है,
मगर लोग इतना सताते हैं,
जैसे उन्हें यकीन हो गया हो
कि खुदा तो सिर्फ उनका है।

मैं कहता हूँ—
मेरी राहों में काँटे मत बिछाओ,
क्या पता कल तुम्हें ही
मुझसे मिलने आना पड़े,
और उन्हीं काँटों पर
तुम्हें भी चलना पड़े।

इसलिए किसी की राह मुश्किल मत करो,
वक्त का पहिया घूमता जरूर है,
आज जो राह तुम्हारी है,
कल वही राह तुम्हारी परीक्षा भी हो सकती है।

खुदा सब देखता है,
और याद रखना—
वह किसी एक का नहीं,
सबका है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर