आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हम पहले से ज्यादा मजबूत बन जाएँ।

                
                                                         
                            दुख ऐसा देना
                                                                 
                            

दुःख वो देना कि छाती फट जाए,
और छाती वो देना
कि कैसा भी दुःख झेल जाए।

ज़िंदगी अगर इम्तिहान ले,
तो हौसला इतना देना
कि आँसू आँखों तक आएँ,
मगर हिम्मत न टूट पाए।

रास्ते चाहे कितने कठिन हों,
कदम रुकने न पाएँ,
दर्द चाहे कितना गहरा हो,
हम उससे हार न जाएँ।

ऐ ज़िंदगी,
दर्द कम मत करना,
बस दिल इतना मजबूत करना
कि हर दर्द के बाद
हम पहले से ज्यादा मजबूत बन जाएँ।
-रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
22 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर