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चतुराई से बड़ी समझदारी

                
                                                         
                            चतुराई से बड़ी समझदारी
                                                                 
                            

जो दुनिया की सारी चतुराई समझे,
पर खुद चाल न चले,
हर चेहरे के पीछे छिपे सच को जाने,
फिर भी किसी का दिल न छले।

जिसे पता हो कौन अपना, कौन पराया,
किसने सच कहा, किसने भ्रम फैलाया,
फिर भी अपनी सादगी को न छोड़े,
न बदले अपना व्यवहार, न रिश्ता तोड़े।

चतुराई समझना बुरी बात नहीं,
उसे दिखाना जरूरी नहीं,
बुद्धिमान वही है इस दुनिया में,
जो सब समझकर भी
हर बात का जवाब नहीं देता।

ऐसा व्यक्तित्व बनाना है तुम्हें—
दुनिया की हर चाल समझो,
पर खुद चालाक मत बनो;
लोगों को पढ़ो,
पर उन्हें छलो मत।

क्योंकि असली जीत यही है—
सबकी चतुराई समझकर भी
अपने संस्कारों से समझौता न करना।
— रजनी
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44 मिनट पहले

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