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बरबादी दोनों में है

                
                                                         
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गलत बहू आए तो घर बरबाद,
अच्छी बहू आए तो परिवार मिलकर
बहू का जीवन बरबाद कर देता है।

फर्क़ बस इतना है,
एक तरफ़ बहू रिश्ते नहीं निभाती,
दूसरी तरफ़ परिवार
इंसानियत नहीं निभाता।

बरबादी दोनों में है,
यदि इंसानियत न निभाई जाए,
रिश्ते चाहे कोई भी हों,
उनमें संवेदना न हो
तो घर कभी घर नहीं बन पाए।

बहू हो या परिवार,
रिश्ता तभी खूबसूरत है
जब दोनों एक-दूसरे को
इंसान समझकर निभाएँ।

— रजनी
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9 घंटे पहले

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