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चाहत संध्या की

                
                                                         
                            तुम वो शुरुआत हो
                                                                 
                            
जिसकी मैंने कभी तलाश नहीं की थी ..
लेकिन जब तुम मिले,
तब एहसास हुआ की
मै शायद बरसों से
अनजाने में तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था ..
तुम्हे पाने के बाद समझ आया
की कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में
इत्तेफ़ाक़ से नहीं आते,
वो हमारी अधूरी दुवाओ का जवाब बन कर
आते है ...
और अब दिल सिर्फ इतना जानता है --
दुनिया में बहुत कुछ चाहा जा सकता है ,
मगर मुझे वही चाहिए था
जो मुझे तुममें मिल गया ....
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1 सप्ताह पहले

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