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2026 से 1980 की ओर

                
                                                         
                            2026 से 1980 की ओर
                                                                 
                            

2026 में बैठा है मनुष्य आज
हाथ में उसके जग सारा
फिर भी खोज रहा है वह
1980 का समय प्यारा

वहां न मोबाइल की घंटी थी
न चैट का शोर था
चिट्ठी का इंतजार था
और मिलने का भोर था

रेडियो पर गीत बजते थे
आंगन में बातें होती थी
शाम ढले सब साथ बैठते
दिल से दिल की बात होती थी

आज फिल्टर वाली हंसी है
तब बिना फिल्टर प्यार था
आज सब कुछ पास है फिर भी
तब सबका इंतजार था

इसीलिए 2026 का मन
1980 में जा रहा है
भीड़ भरी इस दुनिया में
सुकून वहीं पा रहा है
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एक दिन पहले

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