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मधुर संगीत

                
                                                         
                            जागते हुए भी नींद में रहना बिल्कुल अच्छा नहीं,
                                                                 
                            
मेहनत करना है कर्म आलस हमारा गहना नहीं।

वक्त को जो पहचान गया वही वक्त का हुआ,
जिसने दरकिनार किया वक्त वो समझदार नहीं।

थोड़ा थोड़ा सा ही वक्त मिला है सबको,
वही अपना है बाकी का हमारी जागीर नहीं।

प्रकृति की हर शय जी नहीं चुराती मेहनत से,
सर्वश्रेष्ठ कृति जगत की इस रोग से अछूती नहीं।

कर्म से ही भरे जाएंगे जीवन की तस्वीर में रंग,
बेरंग तस्वीर की इस जगत में कोई कीमत नहीं।

बीज जब मिटा देता है खुद को मिट्टी की गोद में,
बिन मिटे बीज का दरख़्त बनना संभव नहीं।

वक्त के संग चलें तो हर आवाज लगती है संगीत,
वरना मधुर संगीत भी में शोर के सिवा कुछ नहीं।
-राज कुमार कौंडल
 
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8 घंटे पहले

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