कौन चालबाज़ यहां
कौन दिलजान यहां
मैं क्यों प्यार मांग रहा?
नौकरी का नहीं अता पता
भगवान हिम्मत दे दो
और मेहनत करने के लिए...
सीख ले चुका हूं
बेखुदी में और ना मौके गवाने हैं!
वैसे ही, अब, एक दो ही मिलने हैं...
सुख के दिन मेरे, संघर्ष के दिन मेरे हैं...
-राहुल
.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X