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मैं हर छन उदास फिर?

                
                                                         
                            जो होना था
                                                                 
                            
हो चुका

'अब'
अच्छा करने से...

मैं क्यों रुका?

जो भगवान को
मंज़ूर हो

अभी दिखा दो राहुल...
पूरा ज़ोर शोर!

मैं खुश हूं... यारों

ऐ ख़िज़ाँ, तुम भी हसो

हर मौसम,
मेरी नज़र के मुताबिक़

क्यों रहूं...
मैं हर छन उदास फिर?

बेचैन मन
पाएगा शांति

कर मेहनत
संभलेगी हस्ती 🙂

मेरी ईमानदारी...
दम भरेगी!

क्या बेईमानी...

बूंद-भर ग़म देगी...


.
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3 घंटे पहले

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