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बेकारी का अपशकुन

                
                                                         
                            भगवान
                                                                 
                            
कोई चीज़

मेरे
पक्ष में कर दो?

मैं
बेसब्र...

नहीं,
बड़े ईनाम के लिए

रुक पा रहा हूं :(

बार बार
उस सिम्त जा रहा हूं

(बार बार चिंता
सबब बन रही हो)

नींद को कुछ दिन
बांध सकूं

नदी को कैसे
बांध गए लोग?

दोस्ती का देवलोक...
मुझे भी नसीब हो

दिल्लगी के ज़ख्म
बेकारी का अपशकुन

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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