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दबी आह

                
                                                         
                            सब कुछ तो
                                                                 
                            
छोड़ दिया है

बची चीज़ें भी...
बंदा रोक रहा है

क्या करूं,
सहारे की ज़रूरत है 

पुरानी कार हूं...
बिना धकेले... नहीं शुरू होनी है

साथ के साथ
मेहनत भी करते जाऊं?

मैं,
अपनी...

एक अलग... धुन गाऊं :(

कि पहले
थोड़ी मदद करो मेरी!

जो बचे अच्छे कर्म हैं...
लो, वो भी रख दिए गिरवी

मैं अपना
हक़ मांग रहा हूं 🥲

ना की हसीन
रंग मांग रहा हूं

अधूरी आस
क्यों दे के रखी है?

हो सके आगाज़...
तो सड़क भी नहीं है

दूर होना कठिन है
हां, पर, कोशिश कर रहा हूं

जब भी होना मिलन है...
'चुप्पी' लिखकर रख रहा हूं

क्या पता
भूल-भाल जाऊं?

अचानक
झूल डाल जाऊं

दोस्ती की...

तिश्नगी की...

-राहुल




.
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11 घंटे पहले

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