अभी दिल ख़ाली रखो
बाद की... तैयारी रखो
मेरा,
दिल टूटा है... एक बार पूछ तो लो?
ये,
प्यास की लत
कौन डाल गया :(
चारागर को भेज दो!
मेरी,
प्रभु नहीं सुन रहे...
तुम लोगों से क्या लड़ूं...
चलो,
एक बार फिर...
'पहले' मेहनत का सबूत दूं 🫠
बस,
वो पूर्वानुमान की कमान से...
निकला... बाण...
सहा नहीं जाता :(
सपनों के घर को...
नैनों में बसाने के बजाए...
किस स्तर पे मेरा... अरमाँ आ गया :(
ठोस...
अधरों का कहा... गुमाँ... बना लिया
रोज़
अधर में लटकना...
फिर,
बड़ी मन्नतों पे... घुप अंधेरा पाया
नहीं बताऊं
अपने दुख... किसी को...?
मेरे मुताबिक़
कुछ तो होए... ख़ुदा, कहीं तो?
'एक' मेरी मांग... मान लो
अगर मैं वादे से... पीछे हटूं...
खुदको काफ़िर से भी नीचे समझूं...
-राहुल
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