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जाते जाते उसे आख़िरी दफ़ा देखा है

                
                                                         
                            जाते जाते उसे आख़िरी दफ़ा देखा है,
                                                                 
                            
बरसो बाद मुसाफ़िर ने मंज़िल को देखा है।

एक नाव में सवार थे हम दोनों,
मैंने समंदर देखा उसने किनारा देखा है।

कोई तो हक़ीक़त से वाक़िफ़ करवाओ मुझे,
मैंने आज फिर से उसे ख़्वाब में देखा है।

कैसे कहुँ की वो सिर्फ़ मेरा था,
रक़ीब ने उसके शाने का तिल देखा है ॥
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2 महीने पहले

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