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नौकरी का पहला दिन

                
                                                         
                            जब नौकरी का पहला दिन था।
                                                                 
                            
बहुत से अनजान लोग मिले थे
जिनसे पहले कभी मिलना न हुआ था ।
ना हमारा एक दूसरे से परिचय था।

कोई दिल्ली से कोई यूपी से
तो किसी को हिमाचल से आना था
कोई राजस्थान से तो कोई एमपी से
तो किसी का घर हरियाणा था।

अब सबका एक ही ठिकाना था
सुबह का आना और शाम को जाना था।
सभी के अलग- अलग काम थे
कोई हंसते हुए करता तो
किसी को लगता मनमाना था।

जब आए थे तब सबका उत्साह देखने लायक था
हम अपनी कर्मस्थली को स्वर्ग बना कर रखेंगे
यही सबके मन में तमन्ना और ख्वाहिश था ।

धीरे - धीरे काम के बोझ से दब गए
सारे अरमान पानी में बह गए।
अब तो सिर्फ बच्चों का भविष्य दिखता है
सारा कर्मचारी इसी में पिसता है।

मेहनत रात - दिन कर रहे हैं
ऊपर वालो के ताने सुन रहे हैं
सब कुछ अच्छा बनाने के चक्कर में
गेंहू के साथ घुन भी पीस रहे ।

कब दिन बीता ,कब रात आई
कब गर्मी ,सर्दी कब बरसात आई।
डर भी था पर हिम्मत भी साथ आई
हर चुनौती से आगे बढ़ने की बात आई।

राह कठिन है जानती हूं
पर अपने कर्तव्य को पहचानती हूं।
हर चुनौती को हंसकर अपनाउंगी
जीवन की राह में आगे बढ़ती जाऊंगी ।

दिन पहला और आखिरी नही होता
सपने अगर जिंदा हो तो आखिरी दिन भी पहला होता है।
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2 घंटे पहले

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