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थोड़ा अमृत घोल के

                
                                                         
                            उस मरे हुए प्रेम में
                                                                 
                            
थोड़ा अमृत घोल के पी लेना
तुम सिसक _सिसक के रो लेना
कुछ ठिठक_ ठिठक जी लेना
वो बचा हुआ कुछ आधा सा
आधे अधूरे कुछ वादा सा
कुछ बचे खुचे अहसासों से
तुम दर्द को अपने सी लेना ।
उस मरे हुए प्रेम में
थोड़ा अमृत घोल के पी लेना
वो आरजू तुम्हारे इंतजार वाली
प्यार भरी बातें करार वाली
जब याद आए तो
आँसुओ की लड़ियाँ पिरो लेना
दहलीज पे मेरे आने की आहट जो आए ,
कोई भ्रम से भरी खूबसूरती जो सताये
तुझे आज जो तेरा मन समझाए
तुम मन से इतर थोड़ा हो लेना
तुम अपने आप समझ लेना
तुम सिसक _सिसक कर रो लेना
तुम ठिठक ठिठक के जी लेना
उस मरे हुए प्रेम में
थोड़ा अमृत घोल के पी लेना
वो जो सच्चा वाला था
या झूठा वाला था ,
हर बार मनाने वाला था
या रूठा वाला था
जब दिल में आए सवाल
तो पछतावे वाले दर्द से
यादों की पुरानी तस्वीर धो लेना
तुम सिसक सिसक के रो लेना
थोड़ा ठिठक_ ठिठक के जी लेना

 
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2 दिन पहले

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