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तासीर सपनों की

                
                                                         
                            बोएं हुए सपने थोड़ा और पकेंगेसोच के के कई रात जागे
                                                                 
                            
पर सपनों की पेचीदा तासीर
कुछ ऊगा नहीं कुछ पका नहीं
कुछ कमजोर थे कुछ बेजान
पर अभी भी उम्मीद में हूँ
ऐ मेरे भगवान
मैं अभी थका नहीं
धुएं और रेत के कब्रिस्तान में
बोए है बीज
कुछ अमन के
शांति के
सौहार्द के
और प्रेम के
पर रेतीली जमी पर कुछ भी पैदा हुआ नहीं ।
अमन शायद थोड़ा नीचे दफन है
के पनप नहीं पाएगा
शांति के बीज हल्के है जो ,
हवा उड़ा ले के जाएगा
सौहार्द खारे रेत में
और खारा हो गया है
ऐसा लगता है बीज का अस्तित्व
बेसहारा हो गया है
पर मेरे भगवान अभी भी मै थका नहीं ।
नास्तिकों की एक बस्ती में
कुछ आस्तिकों का ठिकाना है
जिनको बाग उजाड़ने हो उजड़े
हमें तो फूल खिलाना है
आना जो हो धरती पर फिर से जो राम जी
तो याद रखना आपको भी भगवान ही भरोसे आना है।
यहां बारूदों की सुरंगों में
जीवन की गुंजाइश है
नफरतों के इस जहां में
मोहब्बतो की फरमाइश है
ये जहां आज भी जाने कितने टुकड़ों में बटा बैठा है
पर वो जो सिर्फ एक है
आज उसी की आजमाइश है
वैसे तो बोए हुए सपनों से
दुनिया नहीं चलती
और सच्चाई मेरे दुनिया की
मुझे नहीं अच्छी लगती ।
पर क्या करे अभी भी
उम्मीद में हूँ
ऐ मेरे भगवान
मैं अभी थका नहीं ।

 
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2 महीने पहले

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