जिसके लिए हमने उम्र गुजार दी,
वो हमको मिल जाए तो, इसमें हैरत की क्या बात है
आज इतने फूल खिले हैं,
शायद ये मेरे कर्मों का फल है,
कभी ऐसा सोचा नहीं था,पर कोशिश जरूर की थी
जिसके लिए हमने गुजारे कितने पल ,
जब कुछ अच्छा हो तो, वो पल याद आते हैं
तुम चाहो तो हस्ती मेरी मिटा दो,
पर जो दिल में बस गया है,उसको कैसे मिटाओगे
मेरे रक्त के कण कण में बसा है जिसका प्यार
यह जरूरी नहीं वो कोई हसीन लड़की हो मेरे यार
कहते हैं ढूंढो तो मिल जाते हैं भगवान
जब भी पड़ी जरूरत हमने हंसकर लूटा दी है अपनी जान
यह मेरी कविता किसी के लिए नही है कोई पहेली
अपनी मेहनत, लगन और चाहत को हमने ही ललकारा है
आओ हम मिलकर गाए प्यार का वो तराना
रंग दे प्यार के रंग मेे सारा जमाना
-रविन्द्र अमन
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