मैं झूठ का पर्दा हटा कर, हकीकत सामने लाता हूं
मैं झूठ बोलता हूं, पर पकड़ में नहीं आता हूं
मेरे दिल में भी कुछ पलते हैं अरमान
सपना क्यों ना मैं देखूं, मै भी तो हूं जवान
फितरत मेरी बुरी नहीं औरों की तरह
फिर भी किसी हसीना को देखकर मैं भी शर्माता हूं
मैं झूठ बोलता हूं ,पर पकड़ में नहीं आता हूं
अगर कोई भूल हो तो, झट से कह देता हूं सॉरी
डर लगता है कहीं पकड़ी जाए ना मेरी चोरी
अगर मुझसे कोई गलती हो तो
मैं ईश्वर से डरता हूं
मैं जरूर घबड़ाता हूं
मैं झूठ बोलता हूं , पर पकड़ में नहीं आता हूं
ठीक औरों की तरह है मेरी भी कहानी
कुछ अपने बारे में कहूं तो , होगी बड़ी नादानी
किसी चीज पर मेरा दिल आ जाए तो
मैं अपने दिल से लड़ जाता हूं
अपने दिल को समझाता हूं
मैं झूठ बोलता हूं,पर पकड़ में नहीं आता हू
मैं एक दिन पकड़ा गया, मुझ पर थे कुछ इल्जाम
जब मचा बवाल तो मेरे साथ आ गया
कितने बुजुर्गों, कितने समाज सुधारकों के नाम
जो भला बुरा मेरा होना था हुआ
मैं अपने हाल पर नहीं , उनके हाल पर तरस खाता हूं मैं झूठ बोलता हूं, पर पकड़ में नहीं आता हूं
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