है थोड़ी सी कड़वी, पर सच है मेरी बोली
मैं कुछ गलत कहूं ना, क्यों लगे किसी को गोली
तुम चिल्लाओगे सब देखेंगे तमाशा
तुम चुप रहो देखो लोगों का तमाशा
इतना मत गिरो कि मुश्किल हो जाए तुझको उठना
वो लोग तुझको उठाने आए हैं, जिनका डूबा है आशियाना
पहनकर सच्च का चोला,बदल कर अपना वेश
वो हमारे पास आए हैं, कुछ लेकर अच्छा उपदेश
सब हैं यहां शेर, तुम बने रहो इंसान
यूं ही गवाते रहना, रोज तुम अपनी जान
तुम भी बन जाओ शेर , तुम छोड़ दो इंसानियत
मैं झूठ ना बोलूं, वो भूल जाएंगे अपनी आदत, अपनी फितरत
कुछ लोगों को है खुद पर बड़ा गुमान
किसी भी मायने में हम किसी से कम नहीं हैं
रखते हैं हथेली पर हर पल अपनी जान
-रविन्द्र अमन
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