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बृज के भाव

                
                                                         
                            ब्रिज धाम है निराला
                                                                 
                            
जो 84 कोश में आता
जिसका जन जन राधा राधा गाता
जय हो बृजराज तुम्हारी__2
यमुना गोकुल वृंदावन
मथुरा गोवर्धन बरसाना
नंदगांव दाऊ जी
ये सब ब्रिज भूमि म आता
संत, दुखिया और असहाय की धरा
ईन सब का रखवाला है बांकेबिहारी
जो किसी दुखी नहीं हौने deta
यहाँ बोली जाती है बृज भाषा
जो सबको बड़ी bhanti
बृज रज ना कोई मिट्टी
ये है बृजवासियो के माथे का तिलक
जो 84 कोष की परिक्रमा lagata
84 लाख योनियो से मुक्त हो जाता
जय हो बृजराज तुम्हारी__2

 
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3 महीने पहले

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